
अजीत मिश्रा (खोजी)
संतकबीरनगर पुलिस का महा-ऑपरेशन: करोड़ों की ठगी करने वाले 5 ‘डिजिटल डकैतों’ का साम्राज्य ध्वस्त
- सावधान! आपके नाम पर कोई और तो नहीं उड़ा रहा करोड़ों? संतकबीरनगर में हुआ बड़ा खुलासा।
- कीबोर्ड के ‘कसाई’ पहुंचे सलाखों के पीछे: 33 एटीएम और अवैध कारतूसों के साथ 5 लुटेरे गिरफ्तार।
- इटावा के ‘कमांडर’ से संतकबीरनगर के गुर्गों तक… ऐसे बिछाया गया था 8 राज्यों में ठगी का जाल!
- एसपी संदीप कुमार मीना का मास्टरस्ट्रोक: साइबर थाना और एसओजी ने किया ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का बड़ा धमाका।
- 37 बैंक खाते, 5 करोड़ का ट्रांजेक्शन और 5 गिरफ़्तार: संतकबीरनगर पुलिस की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक।
- हथियारों से लैस थे ‘डिजिटल लुटेरे’, पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचा; करोड़ों की ठगी का पर्दाफाश।
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश (16 अप्रैल 2026)
संतकबीरनगर। जनता की गाढ़ी कमाई पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठे ‘डिजिटल डकैतों’ के खिलाफ पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में संतकबीरनगर पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और मारक प्रहार किया है। साइबर क्राइम थाना, एसओजी और धनघटा पुलिस की संयुक्त टीम ने 15 अप्रैल को एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसका जाल उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे आधा दर्जन राज्यों तक फैला हुआ था।
पुलिस की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ में विजय यादव, नीतेश कुमार, शक्ति, विकास पाण्डेय और आर्यन पाल नाम के 5 शातिर अपराधियों को दबोचा गया है, जो तकनीक की आड़ में देश के कोने-कोने से ठगी की रकम को डकार रहे थे।
गरीबों की मजबूरी को बनाया ‘हथियार’: गिरोह का घिनौना चेहरा
इस गिरोह के काम करने का तरीका (Modus Operandi) किसी प्रोफेशनल अपराधी से कम नहीं था। ये शातिर ठग गांव-देहात के भोले-भाले, गरीब और असहाय लोगों को अपना निशाना बनाते थे। उन्हें चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। खाते खुलते ही अपराधी एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक अपने कब्जे में ले लेते थे।
इन खातों का इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) के रूप में किया जाता था, ताकि जब पुलिस जांच करे, तो असली अपराधी के बजाय कोई मासूम गरीब पकड़ा जाए। फर्जी दस्तावेजों और गलत पते के सहारे ये अपराधी अपनी पहचान को अंधेरे में रखने के माहिर खिलाड़ी थे।
5 करोड़ का काला साम्राज्य और ‘इटावा’ कनेक्शन
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। पुलिस ने गिरोह के 37 बैंक खातों को खंगाला है, जिनमें अब तक 5 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन पाया गया है। साइबर सेल की तत्परता से करीब 6 लाख रुपये तत्काल फ्रीज करा दिए गए हैं, जिससे ठगों की आर्थिक कमर टूट गई है।
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह की डोर इटावा निवासी एक ‘कमांडर’ के हाथों में थी। ये अपराधी उसे डेटा और खाते उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले इन्हें मोटा कमीशन मिलता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए ये अपनी मोटरसाइकिल की नंबर प्लेट तक बदल देते थे, ताकि सीसीटीवी और पुलिस चेकिंग को गच्चा दिया जा सके।
बरामदगी: ठगी के कंट्रोल रूम का खुलासा
गिरफ्तारी व बरामदगी के आधार पर मु0अ0सं0 03/2026 धारा 318(4),336(3),338,340(2),3(5) बीएनएस व धारा 66 (c), 66(d) आई0टी0 एक्ट व धारा 3/25 आर्म्स एक्ट पंजीकृत किया गया ।
गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पताः-
- विजय यादव पुत्र भालचन्द यादव निवासी जगदीशपुर थाना धनघटा जनपद संतकबीरनगर ।
- नीतेश कुमार पुत्र सभाजीत निवासी त्रिलोकपुर थाना बेलघाट जनपद गोरखपुर ।
- शक्ति पुत्र शिवकरन निवासी कुसफरा थाना धनघटा जनपद संतकबीरनगर ।
- विकाश पाण्डेय पुत्र सभामणि पाण्डेय निवासी लोहरैया थाना धनघटा जनपद संतकबीरनगर ।
- आर्यन पाल पुत्र संजय पाल निवासी भरवल परवतवा थाना धनघटा जनपद संतकबीरनगर ।
बरामदगी का विवरणः-
- 33 अदद एटीएम कार्ड
- 12 अदद मोबाइल
- 29 अदद पासबुक
- 18 अदद चेक बुक
- 24 अदद सिम कार्ड
- 02 अदद लेटर पैड
- 06 अदद आधार कार्ड
- 06 अदद पैन कार्ड
- 01 अदद पासबुक कार्ड
- 02 अदद लैपटाप
- 02 अदद लेपटाप चार्जर,
- 01 अदद मोटरसाइकिल
- 02 अदद रबर स्टाम्प
- 08 अदद अवैध जिंदा कारतूस .32 बोर
- 16750 रुपये नगद
घटना एवं पूछताछ का विवरण
थाना धनघटा को I4C (गृह मंत्रालय) के समन्वय पोर्टल के माध्यम से संदिग्ध बैंक खातों की सूचना प्राप्त हुई । जांच के दौरान संदिग्ध सन्नी भारती को थाना पर बुलाकर पूछताछ की गई, जिसने बताया कि विजय यादव एवं नीतेश कुमार द्वारा उसका खाता पंजाब एंड सिंध बैंक में खुलवाया गया था ।जांच में सामने आया कि अभियुक्तों का एक संगठित गिरोह है, जिसका सरगना शक्ति है । यह गिरोह गरीब एवं असहाय लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और एटीएम, पासबुक व चेकबुक अपने कब्जे में रख लेता था ।गिरोह फर्जी पते व दस्तावेजों का उपयोग कर साइबर ठगी करता था और अपनी पहचान छुपाने के लिए गलत जानकारी देता था । प्राप्त खातों का उपयोग देश के विभिन्न राज्यों बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश व कर्नाटक से ठगी की धनराशि मंगाने में किया जाता था ।अभियुक्तों द्वारा बताया गया कि वे समस्त डाटा अपने एक कमांडर (जनपद इटावा निवासी) को उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले उन्हें कमीशन प्राप्त होता था ।
पुलिस टीम द्वारा सूचना के आधार पर पहले विजय यादव एवं नीतेश कुमार को गिरफ्तार किया गया, तत्पश्चात मेहदावल मार्ग स्थित बालू शासन पुल के पास से शेष 03 अभियुक्तों (शक्ति, विकास पाण्डेय, आर्यन पाल) को गिरफ्तार किया गया ।
पूछताछ के दौरान यह भी ज्ञात हुआ कि अभियुक्त मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन नंबर बदलकर चलते थे । वाहन के कागजात प्रस्तुत न करने पर मोटरसाइकिल को धारा 207 एमवी एक्ट के अंतर्गत सीज किया गया ।
साइबर क्राइम थाना द्वारा जांच में पाया गया कि कुल 37 खातों के माध्यम से लगभग 05 करोड़ का लेन-देन किया गया था, जिसमें से लगभग 06 लाख रुपये से अधिक होल्ड (फ्रीज) कराए गए हैं । शेष अन्य खातों की जांच प्रचलित है ।
गिरफ्तार करने वाले अधिकारी / कर्मचारीगणः-
साइबर क्राइम थाना उ0नि0 ललित कान्त यादव, उ0नि0 रमेश, उ0नि0 जयप्रकाश यादव, हे0का0 हिन्दे आजाद, का0 रामप्रवेश, का0 शिवम यादव, का0 धीरेन्द्र कुमार ।
एसओजी प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह, हे0का0 विवेक कुमार राय, हे0का0 अनुप राय, का0 अभिषेक सिंह, का0 बीर बहादुर यादव, अपराध निरीक्षक थाना धनघटा रामेश्वर यादव ।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ठगी के साथ-साथ ये अपराधी हथियारों से भी लैस थे। इनके पास से .32 बोर के 8 अवैध कारतूस बरामद हुए हैं, जिससे स्पष्ट है कि ये गिरोह डिजिटल अपराध के साथ-साथ हिंसक वारदातों के लिए भी तैयार था।
कानूनी शिकंजा और ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का संदेश
गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल (I4C) और NCRP से मिली खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई यह कार्रवाई ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का बेहतरीन उदाहरण है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।
अजीत मिश्रा (खोजी) की कलम से चेतावनी: यह खुलासा उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो लालच में आकर अपने बैंक खाते या दस्तावेज दूसरों को सौंप देते हैं। संतकबीरनगर पुलिस की यह कार्रवाई बस्ती मंडल के अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर है कि अगर पुलिस सक्रिय हो, तो अपराधियों का बचना नामुमकिन है।

















